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रावण दहन का विरोध शुरू : पुतला जलाने पर रोक लगाने की मांग, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा पत्र, कोर्ट जाने की दी चेतावनी

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रावण दहन का विरोध शुरू : पुतला जलाने पर रोक लगाने की मांग, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा पत्र, कोर्ट जाने की दी चेतावनी

 

आज पूरे देश में रावण दहन का कार्यक्रम किया जा रहा है हर साल की तरह रावण दहन का विरोध शुरू हो गया है. झारखंड ग्रामीण सभा और युवा ब्राह्मण शक्ति दल सहित विभिन्न ब्राह्मण सभा के संगठनों में रावण के पुतले के दहन को अनैतिक बताते हुए इसका विरोध करते हुए प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को पत्र भेजा है. सभी ने पुतला दहन पर रोक लगाने की मांग की है उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि रावण जैसा पंडित पूरे ब्रह्मांड में नहीं था श्री राम ने भी रावण के वध करने के उपरांत अपने भाई शत्रुघ्न से रावण के पैर छूने के लिए कहा था और जीवन उपयोगी शिक्षा ग्रहण करने के लिए कहा था. महान पंडित रावण का पुतला जलाना कहां तक जायज है l ब्राह्मण ने साथ ही चेतावनी जारी की है कि, यदि जल्द ही रावण दहन की प्रक्रिया नहीं रुकती तो ब्राह्मण समाज कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. यहां के लोग रावण दहन के विरोध में उतर आए हैं.। रावण का पुतला दहन किए जाने की परंपरा पर रोक लगाने की मांग की. साथ ही उन्होंने प्रखंड विद्वान रावण का पूजन किया. इस अवसर पर “नरेंद्र भाई किशोर भाई जोशी” ने कहा कि हिंदू पद्धति में मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद बार-बार उसके पुतले का दहन करना मान्य नहीं है. भगवान राम के आचार्य महादेव के परम भक्त प्रकांड विद्वान रावण का पुतला दहन करना ब्रह्म हत्या से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें भगवान राम के आदर्शों का पालन करते हुए रावण का पुतला दहन नहीं करना चाहिए. भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए लंकेश से पूजन कराया था. वह स्वयं जानकी जी को साथ लेकर पूजन करने के लिए आए थे तो फिर हमारी हिंदू समाज के लोग किस बुराई के कारण उनका प्रतिवर्ष पुतला दहन करते हैं.।

मृत व्यक्ति के पुतले का दहन अपमान “अशोक तियागी ” ने कहा कि प्रत्येक वर्ष में रावण का पुतला दहन करना गलत माना जाता है ।

 

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मृत व्यक्ति का पुतला दहन करना एक अपमान की श्रेणी में आता है, जिसकी कानून भी इजाजत नहीं देता है. हमारे संविधान में भी किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. समाज का कुछ वर्ग महाराज दशानन के पुतला दहन को करके समाज के एक वर्ग का और उनकी धार्मिक आस्थाओं का अपमान करते हैं. यह अशोभनीय है.। “बिरेंद्र पासवान” कांग्रेस इंटक प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता झारखण्ड ने कहा कि रावण की विनम्रता : राम ने जब रामेश्वरम् में ‍शिवलिंग की स्थापना की थी तब विद्वान पंडित की आवश्यकता थी। रावण ने इस आमंत्रण को स्वीकारा था। दूसरी और राम-रावण के युद्ध के दौरान रावण ने लंका के ख्यात आयुर्वेदाचार्य सुषेण द्वारा अनुमति मांगे जाने पर घायल लक्ष्मण की चिकित्सा करने की अनुमति सहर्ष प्रदान की थी। इस तरह रावण की विनम्रता और अच्छाई के किस्से भी कई है।

 

रावण ने दो वर्ष सीता को अपने पास बंधक बनाकर रखा था, लेकिन उसने भूलवश भी सीता को छूआ तक नहीं था। हालांकि इसके पीछे उसकी प्रतिज्ञा थी।आचार्य चतुरसेन द्वारा रचित बहुचर्चित उपन्यास ‘वयम् रक्षामः’ तथा पंडित मदन मोहन शर्मा शाही द्वारा तीन खंडों में रचित उपन्यास ‘लंकेश्वर’ के अनुसार रावण शिव का परम भक्त, यम और सूर्य तक को अपना प्रताप झेलने के लिए विवश कर देने वाला, प्रकांड विद्वान, सभी जातियों को समान मानते हुए भेदभावरहित समाज की स्थापना करने वाला था।

 

सुरों के खिलाफ असुरों की ओर थे रावण। रावण ने आर्यों की भोग-विलास वाली ‘यक्ष’ संस्कृति से अलग सभी की रक्षा करने के लिए ‘रक्ष’ संस्कृति की स्थापना की थी। यही ‘रक्ष’ समाज के लोग आगे चलकर राक्षस कहलाए।

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