Hindi English Gujarati Marathi Urdu
नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7016137778 / +91 9537658850 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , डिमोलिशन प्लान के तहत नोएडा का ट्विन टॉवर 9 सेकंड में हुआ धराशाई* *नोएडा के सेक्टर-93ए – Joshi News

Joshi News

Latest Online Breaking News

डिमोलिशन प्लान के तहत नोएडा का ट्विन टॉवर 9 सेकंड में हुआ धराशाई* *नोएडा के सेक्टर-93ए

😊 Please Share This News 😊

*डिमोलिशन प्लान के तहत नोएडा का ट्विन टॉवर 9 सेकंड में हुआ धराशाई* *नोएडा के सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक ट्विन टावर हो चुका है जमीदोज* नोएडा के सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक ट्विन टॉवर आज पूर्व निर्धारित समय आज दोपहर दो बजकर 30 मिनट पर यह जमींदोज हो गया। अब सभी के मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर कुतुब मिनार से भी ऊंची इस 40 मंजिला इमारत को क्यों ढहाया जा रहा है। इसे गिराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ी गई। सुपरटेक बिल्डर की तरफ से नामी वकील इस केस को लड़े लेकिन वह ध्वस्त होने से नहीं बचा सके। इसकी मुख्य वजह थी गैरकानूनी तरीके से बनाई गई यह बिल्डिंग। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के सीनियर अधिकारियों पर सख्त टिप्पणी की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कह दिया था कि नोएडा अथॉरिटी एक भ्रष्ट निकाय है. इसकी आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है. अब समझ सकते हैं सुप्रीम कोर्ट ने आखिर ऐसी टिप्पणी क्यों की थी।

 

*बॉयर्स के लिए आसान नहीं थी कानूनी लड़ाई*

दरअसल, एमराल्ड कोर्ट सोसायटी के बायर्स ने ट्विन टावर को बनाने में की गई नियमों की अनदेखी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। ट्विन टावर के बगल की सोसायटियों में रहने वाले लोगों का कहना था कि इसे अवैध तरीके से बनाया गया है। कोर्ट में मुकदमा लड़ने वालों का कहना है कि यह लंबी लड़ाई थी, इसे लड़ना इतना आसान भी नहीं था। जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ट्विन टावर को अवैध घोषित कर इसे गिराने का आदेश दिया तो रियल स्टेट के सेक्टर में बायर और बिल्डर के बीच हुई कानूनी लड़ाई में इसे बड़ी जीत के तौर पर देखा गया।

 

*सुपरटेक बिल्डर ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया* बिल्डर की तरफ से नामी वकील मुकदमा लड़े लेकिन बायर्स ने हार नहीं मानी और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही माना और इसे तीन महीने के अंदर यानी नवंबर 2021 को इसे गिराने का आदेश दिया, लेकिन बीच-बीच में किसी न किसी वजह से मामला टलता गया। अब जाकर 28 अगस्त 2022 को दोपहर ढाई बजे इसे गिरा दिया गया। ट्विन टावर गिराने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले डिमोलिशन से पहले एडिफिस कंपनी ने किया हवन पूजन। ट्विन टावर को आखिरी बार देखने उमड़ पड़ा लोगों का हुजूम,

*नोएडा अथॉरिटी के साथ मिलकर किया गया नियमों से खिलवाड़*

23 नंवबर 2004 को नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर-93ए स्थित ग्रुप हाउसिंग के लिए प्लॉट नंबर-4 एमराल्ड कोर्ट को आवंटित किया, इस जमीन पर 14 टावर का नक्शा भी आवंटित किया गया। सभी टावर ग्राउंड प्लोर के साथ 9 मंजिल तक मकान बनाने की मंजूरी दी गई। इसके दो साल बाद यानी 29 दिसंबर 2006 को नोएडा अथॉरिटी ने संशोधन करते हुए दो मंजिल बनाने का और उसका नक्शा पास कर दिया। इसके तहत सुपरटेक बिल्डर को 14 टावर बनाने और ग्राउंड फ्लोर 9 की जगह 11 मंजिल तक फ्लैट की मंजूरी मिल गई,इसके बाद नोएडा अथॉरिटी ने 15 टावर बनाने का नक्शा पास कर दिया। इसके बाद फिर से 16 टावर बनाने की मंजूरी दे दी, 26 नवंबर 2009 को नोएडा अथॉरिटी ने फिर से 17 टावर बनाने का नक्शा पास कर दिया, इसके बाद नोएडा अथॉरिटी ने 2 मार्च 2012 को संशोधन करते हुए नंबर 16 और 17 के लिए एफएआर और बढ़ा दिया। इससे दोनों टावर को 40 मंजिल तक करने की इजाजत मिल गई और इसकी ऊंचाई 121 मीटर तय की गई। दोनों टावर्स के बीच की दूसरी महज 9 मीटर रखी गई. जबकि नियम के मुताबिक कम से कम 16 मीटर की दूरी होना जरुरी है।

 

*फ्लैट बॉयर्स ने बिल्डर को इलाहाबाद हाई कोर्ट में दी चुनौती*

आरडब्ल्यू अध्यक्ष उदय भान के अनुसार, फ्लैट बॉयर्स ने 2009 में आरडब्ल्यू बनाया और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। ट्विन टावर के अवैध निर्माण को लेकर आरडब्ल्यू सबसे पहले नोएडा अथॉरिटी पहुंचा, लेकिन यहां सुनवाई नहीं होने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 2014 में हाई कोर्ट ने ट्विन टावर को तोड़ने का आदेश दिया। नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन सीईओ ने एक कमेटी का गठन किया जिसमें 12 से 15 अधिकारी व कर्मचारियों को इसके लिए दोषी माना गया। इसके बाद एक हाई लेवल जांच कमेटी का गठन किया गया जिसकी रिपोर्ट के बाद 24 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया गया।

 

*कई बार बदली गई तारीख*

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन उसे राहत नहीं मिली कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को आदेश जारी करते कहा कि इसे तीन महीने के अंदर गिराया जाए। इसके बाद इस तारीख को आगे बढ़ाकर 22 मई 2022 कर दिया गया, लेकिन तैयारी पूरी नहीं होने के कारण इस दिन भी इसे ध्वस्त नहीं किया जा सका। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को मोहलत दी अब इसे 28 अगस्त 2022 रविवार दोपहर ढाई बजे गिरा दिया गया।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]
error: Content is protected !!