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राष्ट्रीय खेल दिवस पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि  

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राष्ट्रीय खेल दिवस पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि

आज डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल, सिंदरी में मेजर ध्यांनचंद की जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाया गया, विद्यालय के प्राचार्य आशुतोष कुमार ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी,

इस अवसर पर विद्यालय में वॉलीबॉल और कबड्डी की अन्तरसदनीय खेल प्रतियोगिता कराई गई, विद्यालय की खेल शिक्षिका शिवानी सिंह ने विद्यालय की चारों सदनों के बालकों की वॉलीबॉल टीमों के मध्य मैच कराए, जिसके फाइनल मुकाबले में सी. वी. रमन सदन ने विवेकानंद सदन को 15-12 से हराकर मैच अपने नाम कर लिया।

इसके साथ ही कक्षा 9 से 12वीं तक के बच्चों के बीच अन्तरसदनीय कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बालक वर्ग में दयानंद सदन ने सी. वी. रमन सदन को 1 अंक से हराकर प्रथम स्थान प्राप्त किया, एवं बालिका वर्ग में रामानुजन सदन ने विवेकानंद सदन को 5 अंक से हराकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।

प्राचार्य आशुतोष कुमार ने सभी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और जीवन में खेल की महत्ता के बारे में समझाया, प्राचार्य महोदय ने इस अवसर पर खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद जी के जीवन का एक किस्सा साझा करते हुए सभी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और जोश भरने की कोशिश की, उन्होंने बताया कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के अंदर का सैनिक उनके खेल में भी नजर आता था, उनके रग-रग में देशप्रेम भरा था, सन 1928 में हॉलैंड ओलंपिक का फाइनल मैच उन्होंने बुखार में तपते हुए खेला था, उन्हें 103 डिग्री बुखार था, हालांकि मैच से पहले टीम मैनेजर ने उन्हें मैदान में उतारने से मना कर दिया था, लेकिन वे माने नहीं थे और अपनी जिद से मैच खेला था, तब मेजर ध्यानचंद ने कहा था “मैं एक सैनिक हूँ, ये मुकाबला मेरे लिए युद्ध के समान है, युद्ध के अंजाम तक पहुंचने से पहले मैं पीठ नहीं दिखा सकता, इसमें जीत मिलने पर गुलामी की जंजीरों में जकड़े भारतीयों को दुनिया के सामने अपना सिर फक्र से ऊंचा करने का मौका मिलेगा, उस मैच में मेजर ध्यानचंद चंद ने एक के बाद एक तीन गोल दागकर हॉलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त देकर ओलंपिक का पहला स्वर्ण पदक भारतीय टीम के नाम कर लिया था।”

इस मैच का आनंद लेने के लिए विद्यालय के सभी शिक्षक-शिशिकाएँ और सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे, सभी ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

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